गीता वाटिका सत्संग का केंद्र : राधाकृष्णजी महाराज

गोरखपुर। रससिद्ध सार्वभौम संत नित्यलीलालीन भाईजी हनुमान प्रसादजी पोद्दार की पावन तपोभूमि गीता वाटिका प्रांगण में भाईजी की 50 वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के पंचम दिवस जोधपुर से पधारे कथाव्यास गोवत्स श्री राधाकृष्णजी महाराज ने कथा प्रसंग के अंतर्गत कहा कि भगवान सीताराम जी का प्रथम मिलन "समर्पण" था । हम लोग प्रथम मुलाकात में एक - दूसरे की "परीक्षा" करते हैं।

कालिय नाग यमुना में रहता था। उसके अंदर विष था। श्रीकृष्ण ने उसका उद्धार किया। हमारे अंदर भी विषय रूपी विष है। हम सत्संग रूपी यमुना में रहें, सत्संग से जुड़े रहें, तभी हमारा कल्याण संभव है ।

गीता वाटिका सत्संग का केंद्र है । यहां आने पर किसी न किसी रूप में सत्संग मिल ही जाता है । भाईजी ने अखंड हरिनाम संकीर्तन की स्थापना इसलिए की कि लोग हरिनाम का प्रसाद पाएं । हरिनाम तुरंत असर करता है । अन्य प्रसाद का असर भी अवश्य होता है , पर तुरंत नहीं । भाईजी- बाबा सबको भाव का पोषण करने वाली वस्तु देते थे । अखंड हरिनाम भाव के पोषण का केन्द्र है । आप भी गीता वाटिका पधारें तो कीर्तन में कुछ समय अवश्य बिताएं । ठाकुरजी जिसका दिल अच्छा देखते हैं उसे भगवत् कथा देते हैं । अयोध्या के नागरिक रामजी को अपना मन समर्पित करते हैं । जिसका मन आपके पास होगा उसकी याद आपको आएगी ही । रामजी वन में भी अयोध्या के पुरवासी जनों को याद करते हैं -

तेरी मर्जी का मैं हूं गुलाम मेरे अलबेले राम।

कुछ भी करा लो न्योछावर दे दो सजा या दे दो ईनाम मेरे अलबेले राम ।।

हार चुका सब अकल लगाकर आप संभालो इंतजाम मेरे अलबेले राम।।

ऐसा अवधवासियों का प्रेम था रामजी से।

विश्वामित्र जी यज्ञ में बाधा डालने वाले राक्षसों को स्वयं भी मार सकते थे , पर उन्होंने ऐसा नहीं किया । उन्होंने विचार किया कि राक्षस मेरे क्रोध से मरेंगे तो उन्हें अधोगति की प्राप्ति होगी और राघवेंद्र सरकार के हाथों मरेंगे तो उनकी सद्गति होगी । इसीलिए उन्होंने दशरथ जी से राम को मांगने का निर्णय लिया।

सीता राम विवाह प्रसंग की सुंदर कथा कही गई। विवाह प्रसंग की सुंदर झांकी भी सजाई गई।

श्री भाईजी की पुण्यतिथि चैत्र कृष्ण दशमी तदनुसार मंगलवार 6 अप्रैल को मनाई जाएगी । प्रातः 6:45 बजे पावन कक्ष से प्रभातफेरी प्रारंभ होगी जो 7:30 बजे समाधि स्थल पर पहुंचेगी । वहां पद गायन कार्यक्रम शुरू होगा । 7:55 बजे विशेष आरती होगी । इसके बाद पुनः पद गायन का कार्यक्रम 9:00 बजे तक चलेगा।

दोपहर में श्री गिरिराज पूजन- अर्चन का कार्यक्रम संपन्न होगा ।


 कथा 9 अप्रैल तक चलेगी।

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