सैकड़ों का किया मुफ्त में इलाज, लेकिन खुद हार गए कोरोना से जिंदगी की जंग


-डॉ. केके अग्रवाल: मुंह में ऑक्सीजन लगाकर करते रहे मरीजों की मदद, लेकिन खुद हार गए कोरोना से जिंदगी की जंग
-इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और हार्ट केयर फाउंडेशन के प्रमुख एवं पद्मश्री डॉ. केके अग्रवाल का सोमवार रात करीब 11.30 बजे कोरोना संक्रमण के कारण निधन हो गया। उनका निधन चिकित्सा जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति है।

नई दिल्ली। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के पूर्व निदेशक और हार्ट केयर फाउंडेशन के प्रमुख एवं पद्मश्री डॉ. केके अग्रवाल का सोमवार देर रात कोरोना संक्रमण के चलते निधन हो गया। वे पिछले कई दिन से एम्स के ट्रामा सेंटर में भर्ती थे। तीन दिन पहले ही तबीयत बिगड़ने के चलते उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। उनका निधन चिकित्सा जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति है।
देश के जाने माने हृदय रोग विशेषज्ञ और सर्जन केके अग्रवाल का सोमवार रात 11:30 बजे निधन हो गया, लेकिन उन्होंने जीवन के अंतिम दिनों में भी चिकित्सक होने का कर्तव्य नहीं छोड़ा। उनकी जीवटता और मरीजों के प्रति उनके फर्ज को आप इस तरह समझ सकते हैं कि कोरोना पॉजिटिव हो जाने के बाद भी उनके चेहरे पर एक शिकन नजर नहीं आ रही थी। यहां तक कि अस्पताल में भर्ती होने से पहले भी वो ऑनलाइन मरीजों की परेशानियां सुलझाते रहे। अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनके मुंह पर ऑक्सीजन पाइप लगी हुई थी बावजूद वे मरीजों को सलाह देते रहे। अग्रवाल को साल 2010 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

दो महीने पहले ही अग्रवाल ने वैक्सीन की दोनों खुराक भी ली थीं, लेकिन बीते माह वह संक्रमण की चपेट में आ गए। डॉ. केके अग्रवाल को कोरोना संक्रमण के बाद एम्स के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। केके अग्रवाल ने अपने ट्विटर अकाउंट पर बीते 28 अप्रैल को जानकारी दी थी कि वह कोरोना संक्रमित हैं।

हजारों लोगों तक पहुंचाई मदद, सैकड़ों का किया मुफ्त में इलाज
62 वर्षीय डॉ. के के अग्रवाल अपने प्रोफेशन में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए तो मशहूर थे ही। साथ ही वे अपनी नेकदिली के लिए भी जाने जाते थे। कोरोना संकट में उन्होंने हजारों लोगों की मदद की। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों का उन्होंने मुफ्त इलाज किया। कोरोना काल में वह एक वॉरियर्स के तौर पर हमेशा डटे रहे, लेकिन दुखद है कि उसी कोरोना से वह जिंदगी की जंग हार गए। हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के जरिये जुनून की हद तक लोगों की मदद में जुटे डॉ केके अग्रवाल के जाने से उनके चाहने वाले लाखों की आंखें नम हैं।

दिल्ली आए और बन गए दिल के डॉक्टर
डॉ. केके अग्रवाल के पिता मध्यप्रदेश के रहने वाले थे। उनके पिता दिल्ली में नौकरी करने आए थे। अपने पिता के साथ ही डॉ. अग्रवाल भी दिल वालों की दिल्ली पहुंच गए। बताया जाता है कि डॉक्टर अग्रवाल बचपन से ही सभी को साथ में लेकर चलने के समर्थक थे। उनका परिवार हमेशा एक आदर्श परिवार में गिना जाता था, सभी को जोड़कर रखने में डॉ अग्रवाल के भी स्वभाव में था।यही स्वभाव एक डॉक्टर के रूप में उनके पेशेवर जीवन में भी देखने को मिलता है।

डॉ. अग्रवाल के नाम हैं ये उपलब्धियां और सम्मान
वह भारत में दिल के दौरे के लिए स्ट्रेप्टोकिनेस थेरेपी (streptokinase therapy) इस्तेमाल करने वाले अग्रदूतों में से एक थे और उन्होंने भारत में कलर डॉपलर इकोकार्डियोग्राफी की तकनीक की भी शुरूआत की। डॉ. अग्रवाल को 2005 मेडिकल कैटेगरी के सर्वोच्च पुरस्कार, डॉ बीसी रॉय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। अग्रवाल को साल 2010 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

इसके अलावा डॉक्टर अग्रवाल ने विश्व हिंदी सम्मान, राष्ट्रीय विज्ञान संचार पुरस्कार, फिक्की हेल्थ केयर पर्सनालिटी ऑफ द ईयर, डॉक्टर डीएस मुंगेकर राष्ट्रीय आईएमए समेत कई अवॉर्ड्स हासिल किए।उन्होंने मेडिकल साइंसेज पर कई किताबें लिखीं हैं।उन्होंने आधुनिक एलोपैथी के साथ प्राचीन वैदिक चिकित्सा, इकोकार्डियोग्राफी पर 6 टेक्स्ट बुक और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में उनके लेख भी प्रकाशित हुए।

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