भारतीय विद्वत् महासंघ द्वारा महाबाहु भगवान परशुराम का अवतरण दिवस मनाया

गोकुलधाम मे मना महाबाहु भगवान परशुराम जी का अवतरण दिवस

गोरखपुर। बैशाख मास शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि (अक्षय तृतीया) को  विश्ववन्द्य महाबाहु चिरंजीवी भगवान परशुराम जयंती मनाया गया।

शुक्रवार अक्षय तृतीया को भारतीय विद्वत् महासंघ व भारतीय युवा जनकल्याण समिति के संयुक्त तत्वाधान में राजेंद्र नगर पश्चिमी गोकुलधाम में लाॅक डाउन व सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए सीमित संख्या मे ही महासंघ के महामंत्री व युवा जनकल्याण समिति के संरक्षक पं.बृजेश पाण्डेय ज्योतिषाचार्य तथा समिति के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप पाण्डेय के नेतृत्व में भगवान परशुराम का पूजा अर्चना कर जयंती मनाई गई।

भगवान विष्णु के छठे अवतार भृगुनंदन जमदग्नि के पुत्र परशुराम के जन्मदिवस पर भगवान परशुराम की पूजा अर्चना करते भारतीय विद्वत् महासंघ के उपाध्यक्ष राजेश कुमार मिश्र।

पं. बृजेश पाण्डेय व कुलदीप पाण्डेय ने भगवान परशुराम की प्रतिमा को जनेऊ पहनाकर तिलक चंदन लगाकर पुष्प व माल्यार्पण करते हुए धूप-दीप प्रज्वलित किए एवं परशुराम जी से विश्व व राष्ट्र की रक्षार्थ हेतु कामना किये तथा विश्व में कोरोना महामारी को शिघ्र समाप्त करने और संक्रमित लोगों की स्वस्थ्य होने की कामना किये।

महासंघ के महमंत्री पं. बृजेश पाण्डेय व समिति के संचालक कुलदीप पाण्डेय ने परशुराम जी की कृतियों पर प्रकाश डालते हुए कहे कि पितृ भक्त परशुराम जी भृगुश्रेष्ठ महर्षि जमदग्नि द्वारा संपन्न पुत्रेष्टी यज्ञ से प्रसन्न देवराज इंद्र के वरदान स्वरूप पत्नी रेणुका के गर्भ से वैशाख शुक्ल तृतीया को अवतरित हुए थे, वे भगवान विष्णु जी के छठें आवेशावतार हैं,पितामह भृगु द्वारा नामकरण संस्कार के अन्नतर नाम राम तथा शिव जी द्वारा प्रदत परशु (फरसा) धारण किए रहने के कारण पशुराम कहलाये! परशुराम जी भारत के ब्राह्मण वंश मात्र के प्रतिनिधि नहीं रहे अपितु सनातन एवं शाश्वत मूल्यों की रक्षा के लिए सर्व समाज द्वारा समादरणीय एवं पूज्यनीय के साथ सदैव ही निर्णायक और नियामक शक्ति रहे।

अश्वत्थामा, हनुमान जी और विभीषण की भांति भगवान परशुराम जी भी चिरजीवी हैं।

"अश्वत्थामा बलिव्र्यासो हनुमांश्च विभीषण: 

कृप: परशुरामश्च सप्तैते चिरजीविन:।। भगवान परशुराम जी का राम जी के काल में और कृष्ण जी के काल में होने की चर्चा होती है। 

कल्प के अंत तक वे धरती पर ही तपस्यारत रहेंगे।

वे योग, वेद और नीति में पारंगत थे, ब्रह्मास्त्र समेत विभिन्न दिव्यास्त्रों के संचालन में भी वे पारंगत थे। जयंती समापन के पश्चात पं. बृजेश पाण्डेय व कुलदीप पाण्डेय द्वारा कार्यालय के समिप सड़क किनारे नीम के पौधे का रोपड़ किया गया, जो भविष्य मे हरियाली युक्त हवादार वृक्ष बनकर जनमानस को आक्सीजन प्रदान करने मे सहायक होगा।

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