यूपी में भाजपा की हार की भव‍िष्‍यवाणी करने वाले आधा ही सच देख रहे!

 इंदिरा गांधी ने ग़रीबी हटाओ का नारा दिया और जनता ने समझा अब तो ग़रीबी निश्चित हटेगी। मोदी ने विकास का नारा दिया और लोग समझे अब अवश्य विकास होगा।

नई दिल्ली। बीजेपी का भविष्य कई पत्रकार, वेबसाइट और टीवी चैनल कह रहे हैं कि बीजेपी की जनप्रियता गिर रही है और इसलिए उसका भविष्य अंधकारमय है। यह आधा सच है। ये पत्रकार फरवरी 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजों के बारे में अटकलें लगा रहे हैं कि इसमें बीजेपी की दुर्दशा होगी। वे यह तर्क भी दे रहे हैं क‍ि इसका संकेत हाल के उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव पर‍िणाम से भी मिलता है।

यह सही है कि इस वक़्त बढ़ती बेरोज़गारी, कोरोना महामारी आदि से बीजेपी की जनप्रियता घटी है। पर इस आधार पर उसके अंधकारमय भव‍िष्‍य की भव‍िष्‍यवाणी करने वाले पत्रकार एक बात भूल जाते हैं क‍ि जनता की याददाश्त कमज़ोर और अल्प दृष्टि से युक्त होती है।

उत्तर प्रदेश के चुनाव आने में आठ महीने बाकी हैं। इस बीच कई ऐसी घटनाएं हो सकती हैं, जो बीजपेी समर्थकों को आज की बदहाली भूलने का अवसर दे सकती हैं। ये घटनाएं वाराणसी की ज्ञानव्‍यापी मस्‍ज‍िद, मथुरा के शाही मस्‍ज‍िद आद‍ि से भी जुड़ी हो सकती हैं। ‘गुजरात’ और ‘मुज़फ्फरनगर’ भी दोहराया जा सकता है। जाह‍िर है, ऐसा कुछ हुआ तो उत्तर प्रदेश पुलिस आँख मूंदे ही रहेगी, क्योंकि उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार है।

अपनी गिरती लोकप्रियता के मद्देनजर 2019 के लोक सभा चुनाव के पूर्व बालाकोट पर हमला भी कुछ ऐसा ही कदम था, जिसके बाद कहा गया ” हमने घर में घुस कर मारा है “और भारत के नागरिकों ने खूब तालियां बजायीं।

मैंने कई बार कहा है कि भारत के 90% लोग बेवक़ूफ़ और भावुक होते हैं, न कि समझदार। इसलिए उन्हें आसानी से झांसा दिया जा सकता है। इंदिरा गाँधी ने ग़रीबी हटाओ का नारा दिया और जनता ने समझा अब तो ग़रीबी निश्चित हटेगी। मोदी ने विकास का नारा दिया और लोग समझ गए क‍ि अब अवश्य विकास होगा।

हमारे संविधान में लिखा है कि भारत धर्म निरपेक्ष देश है पर वास्तविकता कुछ और ही है। भारत में अधिकांश हिन्दू सांप्रादियक होते हैं और अधिकांश मुसलमान भी। साम्प्रदायिक भावनाएं आसानी से भड़कायी जा सकती हैं और चुनाव जब निकट होंगे तो ऐसा अवश्य होगा, क्योंकि हमारी 80% आबादी हिन्दू है, इसलिए बीजेपी फिर चुनाव जीतेगी और सत्ता में आएगी।

-जस्टिस (रि.) मार्कण्‍डेेय काटजू 

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