सख्त निर्देश : सीएम योगी ने कहा टीकाकरण में लापरवाही करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने कहा कि 20 जून तक सभी जिलों में पीआईसीयू और एनआईसीयू का कार्य पूरा करा लिया जाए। सभी मेडिकल कॉलेजों में 100-100 बेड के पीआईसीयू स्थापित किए जा रहे हैं।

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोरोना टीकाकरण में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें किसी तरह की शरारत की शिकायत मिले तो संबंधित के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। टीकाकरण केंद्र पर कोविड प्रोटोकॉल का हर हाल में पालन कराया जाए।
टीकाकरण की स्थिति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान को तेज किया जाए। एक जून से सभी जिलों में टीकाकरण चल रहा है। इसकी लगातार मानीटरिंग की जाए। लोगों को टीकाकरण के बारे में जागरूकता अभियान निरंतर चलता रहे। उन्होंने टीकाकरण केंद्रों की संख्या बढ़ाने, पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि पिछले 24 घंटे में तीन लाख 61 हजार सात सौ 86 से अधिक लोगों का टीकाकरण किया गया है। गुरुवार शाम तक प्रदेश में कुल एक करोड़ 94 लाख 12 हजार 540 डोज लगाए जा चुके हैं। इसमें एक करोड़ 58 लाख 51 हजार नौ सौ 31 को पहली डोज और 35 लाख 60 हजार 609 को दूसरी डोज लगाई गई है। प्रदेश में टीकाकरण के लिए 6027 केंद्र बनाए गए हैं।

20 जून तक पूरा कराएं पीआईसीयू व एनआईसीयू

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टीम 9 की बैठक में निर्देश दिया कि 20 जून तक सभी जिलों में पीआईसीयू और एनआईसीयू का कार्य पूरा करा लिया जाए। सभी मेडिकल कॉलेजों में 100-100 बेड के पीआईसीयू स्थापित किए जा रहे हैं। इसके साथ 50 बेड का एनआईसीयू भी बनाया जाए। इसी तरह जिला अस्पताल और सीएचसी स्तर पर भी मिनी पीकू स्थापित किए जा रहे हैं। सभी जिलाधिकारी हर दिन पीआईसीयू और एनआईसीयू निर्माण कार्य की मानीटरिंग करें। प्रदेश में 85 मास्टर ट्रेनरों का पांच दिवसीय प्रशिक्षण चल रहा है। डॉक्टरों, नर्सिंग स्टॉफ  आदि के लिए पीडियाट्रिक केयर ट्रेनिंग भी चल रहा है। प्रशिक्षण की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए।

ई संजीवनी और टेली कंसल्टेशन को बढ़ाएं

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि चार जून से कोविड प्रोटोकाल का ध्यान रखते हुए ओपीडी शुरू की जा रही है। प्रयास किया जाए कि ज्यादा से ज्यादा लोगोंको ई संजीवनी और टेली कंसल्टेशन के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाए। विशेष परिस्थितियों में ही ओपीडी में मरीज आएं। किसी भी दशा में कहीं भी कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन न हो।

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