पति की लम्बी उम्र कि कामनार्थ हेतु महिलाएं रखेंगी हरितालिका तीज व्रत

हरियाली तीज मे सुहागिन महिलायें सौभाग्य प्राप्ति हेतु शिव पार्वती कि करती है पूजा : पं.बृजेश पाण्डेय

गोरखपुर। ज्योतिषाचार्य पं. बृजेश पाण्डेय ने बताया कि हरितालिका (हरियाली) तीज का पर्व 9 सितम्बर दिन वृहस्पतिवार को है। हिन्दी पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष की भांति भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन माता पार्वती का भगवान शिव से पुनर्मिलन हुआ था।  इस दिन सुहागिन स्त्रियां निर्जल और निराहार रहकर अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं तथा शिव पार्वती जी कि पूजा अर्चना करती है।

हरतालिका तीज पर रवियोग मुहूर्त

पंचांग की गणना के अनुसार, इस साल हरतालिका तीज पर सबसे शुभ रवियोग बन रहा है। माना जा रहा है कि यह योग चित्रा नक्षत्र के कारण बन रहा है। यह योग कल 9 सितंबर दिन बृहस्पतिवार को दोपहर 2 बजे से यानी 2 बजकर 30 मिनट से अगले दिन 10 सितंबर दिन शुक्रवार को 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। वहीं हरतालिका तीज पर पूजा के लिए सबसे शुभ समय शाम को 5 बजकर 40 मिनट से रात को 8 बजकर 15 मिनट तक है। जिस वक्‍त हरतालिका तीज की पूजा की जाएगी उस वक्‍त रवि योग लगा रहेगा। 

ज्योतिषाचार्य पंडित बृजेश पाण्डेय ने बताया कि हरियाली तीज के अवसर पर चारो तरफ हरियाली की छटा छा जाती है, महिलाएं वृक्ष पर इस दिन झूला झूलते हुए मधुर गीत गाती हैं। हरियाली तीज का शुभ मुहूर्त भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि परन्तु शिव और शक्ति की पूजा में राहुकाल का दोष नहीं माना जाता है। हरियाली तीज के दिन इस पूजा मंत्र का जाप करना सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करता है-

देहि सौभाग्य आरोग्यं देहि मे परमं सुखम्। पुत्रान देहि सौभाग्यम देहि सर्व। कामांश्च देहि मे।। रुपम देहि जयम देहि यशो देहि द्विषो जहि !! 

हरियाली तीज के दिन महिलाएं पति व संतान की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं, माना जाता है कि ऐसा करने से महिलाओं को सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन सुहागन महिलाएं निराजल व्रत रखते हुए माता पार्वती तथा भगवान शिव जी की पूजा करती हैं तथा सुहागन महिलाएं स्नान आदि से निवृत होकर मायके से आए हुए कपड़े पहनती हैं। पूजा के शुभ मुहूर्त में एक चौकी पर माता पार्वती, भगवान शिव तथा गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर फिर पार्वती जी को 16 श्रृंगार की सामग्री, साड़ी, अक्षत्, धूप, दीप, गंध आदि अर्पित करें। फिर शिव जी को भांग, धतूरा, अक्षत्, बेल पत्र, श्वेत फूल, गंध, धूप, वस्त्र आदि चढ़ाती है इसके  तत्पपश्चात गणेश जी की पूजा करती है, और हरियाली तीज की कथा सुनती है। हरियाली तीज भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने 107 जन्म लिए थे।

धार्मिक मान्यता है कि मां पार्वती के कठोर तप और उनके 108 वें जन्म में भगवान शिव जी ने देवी पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया तभी से इस व्रत का शुभारम्भ हुआ। हरियाली तीज पर पत्नी चावल की खीर बनाए और इसका भोग माता पार्वती को लगाएं, बाद में पति-पत्नी साथ में ये खीर खाएं तो दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है।

हरियाली तीज पर पूजा समाग्री

हरियाली तीज की पूजा में काले रंग की गीली मिट्टी, पीले रंग का कपड़ा, बेल पत्र , केले के पत्ते, धतूरा, आंकड़े के पत्ते, तुलसी, शमी के पत्ते, जनेऊ,धागा और नया कपड़ा रखें। वहीं, पार्वती शृंगार के लिए चूडियां, महौर, खोल, सिंदूर, बिंदी, बिछुआ, मेहंदी, आल्ता, सुहाग पूड़ा, कुमकुम, कंघी, सुहागिन के श्रृंगार की चीजें होनी चाहिए। इसके अलावा श्रीफल, कलश, अबीर, चंदन, तेल और घी, कपूर, दही, चीनी, शहद ,दूध और पंचामृत आदि एक थाली में सजा लें। पूजा शुरू करने से पहले काली मिट्टी के प्रयोग से भगवान शिव और मां पार्वती तथा भगवान गणेश की मूर्ति बनाएं। फिर थाली में सुहाग की सामग्रियों को सजा कर माता पार्वती को अर्पित करें। साथ ही यह भी मान्ययता है कि जो कुंवारी कन्याएं इस व्रत को रखती हैं उनके विवाह में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं। महिलायें भगवान शिव की आराधना के लिए मंत्र का जाप करें- ऊं हराय नम:, ऊं महेश्वराय नम:, ऊं शम्भवे नम:, ऊं शूलपाणये नम:, ऊं पिनाकवृषे नम:, ऊं शिवाय नम:, ऊं पशुपतये नम:, ऊं महादेवाय नम: तथा माता पार्वती के इस मंत्रों का जाप कर अराधना करें-- ऊं उमायै नम:,ऊं पार्वत्यै नम: ऊं जगद्धात्र्यै नम: ऊं जगत्प्रतिष्ठयै नम: ऊं शांतिरूपिण्यै नम: ऊं शिवायै नम: ।।


ज्योतिषाचार्य पंडित बृजेश पाण्डेय, 


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