गोरखपुर। महानगर के एक होटल में भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद( आई कास),गोरखपुर की ओर से वैदिक ज्योतिष शोध एवं अध्ययन केन्द्र की शुरुआत की गई।यह आईकास का 53वा चेप्टर है।गोरखपुर शाखा में शुरुआत में ज्योतिष प्रवीण एवँ ज्योतिष विराशद सरीखे पाठ्यक्रम का अध्ययन कराया जाएगा।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन करके मुख्य अतिथि शलभ मणि त्रिपाठी, मीडिया सलाहकार, (मुख्यमंत्री, उप्र) ने किया, श्री त्रिपाठी को अंग वस्त्र एवँ प्रतीक चिन्ह आलोक सिंह विशेन (पार्षद) ने प्रदान किया। आईकास सेंटर के संचालक अजय कुमार गौतम ने बताया कि इस संस्था की शुरुआत बंगलोर से 1984 में हुई थी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने यहाँ आकर हमारे आधात्मिक पुस्तकों को जलाने का काम किया, उन्होंने भारत के हार्डवेयर को नही बल्कि सॉफ्टवेयर को नुकसान पहुचाने का कार्य किया। हमारे वैदिक ज्ञान आज के वैज्ञानिक ज्ञान से बहुत आगे थी।

विशिष्ट अतिथि सूर्य कांत मिश्रा आई आर एस, लखनऊ ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। आईकॉस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमेश चिन्तक ने संस्था के बारे में बताया कि इसकी स्थापना डॉ बी बी रमन ने किया था, उन्होंने कहा कि ब्रह्म विद्या ज्योतिष को वेदों का ब्रह्म कहा गया था, ज्ञान की तीन शाखाएं है ज्ञात, अज्ञातएवं अग्यय।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से श्री जितेन्द्र सैनी, पूर्व उपसभापति, मनोज सिंह,अशोक सिंह गौतम कनक हरि अग्रवाल, राजीव सिंह,आशुतोष त्रिपाठी, संजीव सिंह, विजय सिंह, सुरेश कुमार रामरायका, विजय वर्मा,विनोद गुप्ता, रमन रामरायका,श्रीमती मीना गौतम, अनिता पाल सिंह,सहित अनेकों गणमान्य लोग उपस्थित थे।कार्यक्रम के अंत में कनक हरि अग्रवाल के द्वारा सभी अतिथियों को गीता का वितरण किया गया।कार्यक्रम का संचालन डॉ केशव चरण चौधरी ने किया।

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