भ्रांतियाँ मिटा लोगों को कोविड का टीका लगवा रहीं शमा परवीन

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के प्रयासों से सिधारीपुर मदरसे के आस-पास की आबादी प्रतिरक्षित

लोगों को खुद के टीकाकरण का उदाहरण देकर नजदीकी बूथ से दिलवायीं सुविधा


गोरखपुर, 28 नवम्बर 2021। ‘मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिए।‘ इसे चरितार्थ कर दिखाया है आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शमा परवीन ने । वह लोगों के मन में पल रहीं भ्रांतियों को मिटाकर कोविड का टीका लगवाने के लिए राजी करने में जुटीं हैं । उनके प्रयासों से महानगर के सिधारीपुर मदरसे के आस-पास की आबादी प्रतिरक्षित हुई है । जो लोग टीका लगवाने को तैयार नहीं थे उन्हें शमा परवीन ने खुद के टीकाकरण का उदाहरण दिया और नजदीकी बूथ ले जाकर सुविधा दिलवायीं ।

शमा के प्रयासों से करीब 500 लोगों का कोविड टीकाकरण हो चुका है । डेढ़ सौ लोगों को टीका अभी लगना है जिसके लिए वह प्रयत्नशील हैं । पेशे से झोला बनाने का कारोबार कर रही मरजीना इसी इलाके में रहती हैं । उनको यह भ्रांति थी कि टीका लगने से जिंदा नहीं रहेंगे | मरजीना बताती हैं कि इस डर के कारण उनके परिवार का कोई सदस्य टीका लगवाने के लिए तैयार नहीं था । शमा ने उनके घरवालों के समझाया कि उन्होंने खुद जनवरी में अपना टीकाकरण करवाया और वह स्वस्थ हैं । इसके बाद वह टीकाकरण को तैयार हुईंं। टीका लगने के बाद बुखार आया लेकिन अब वह ठीक हैं और उनकी भ्रांति समाप्त हो चुकी है।

इसी इलाके के नसीब आलम पेशे से ड्राइवर हैं । वह भी इस भ्रांति के शिकार थे कि टीका लगने के दो साल बाद मौत हो जाएगी । शमा ने उनकी भ्रांति खत्म की लेकिन उनके सामने टीका लगवाने के समयाभाव की भी चुनौती थी । फिर शमा ने उन्हें बताया कि 14 अक्टूबर को सिधारीपुर में ही कैंप लगेगा। नजदीकी बूथ की जानकारी मिलने के बाद वह टीकाकरण के लिए तैयार हो गये। टीका लगने के बाद हल्का बुखार हुआ जो ठीक हो चुका है।

शमा लोगों को पहले ही इस बात के लिए मानसिक तौर पर तैयार करती हैं कि टीका लगने के बाद बुखार आ सकता है और इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है । वह बताती हैं कि क्षेत्र के लोग उन पर विश्वास करते हैं, इसलिए लोगों को प्रेरित करना आसान होता है । वर्ष 2008 से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के तौर पर कार्य कर रही शमा लॉकडाउन के पहले चरण में ईदी के लिए जुटाए पैसे से इलाके के जरूरतमंदों को राशन पहुंचा कर चर्चा में आई थीं ।


180 घरों में पहुंच

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शमा की अपने क्षेत्र के 180 घरों में पहुंच है । वह कहती है कि इन घरों में रहने वाली 1000 की आबादी में ज्यादातर लोग पढ़े लिखे नहीं है। सिर्फ विश्वास ही वह साधन है जिसके जरिए वह लोगों को स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यक्रमों से जोड़ पाती हैं ।


*अनुकरणीय प्रयास*

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शमा परवीन के प्रयास अनुकरणीय हैं। वह एक चुनौतीपूर्ण इलाके में लोगों को स्वास्थ्य एवं पोषण की राह दिखा रही हैं । समुदाय का व्यवहार परिवर्तन कर उन्हें सुविधा दिलवाना बेहद प्रेरणादायी कार्य है ।

प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, सीडीपीओ (शहरी)

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